मुलाकातों का कोई सिलसिला नही है,
मुझे नही मिला, वो जो मेरा नही है,
कभी की थी उससे मोहब्बत बहुत,
अब उस शख्स पर, वो एतबार नही है,
वक़्त ने कैसी करवट बदली है,
तसव्वुर में भी उसका ख्याल नही है,
किसी मोड़ पर मिलने की चाहत है,
उससे गिला है पर इतना नही है
उसकी सब खाताये माफ़ है "अज़ल",
इंसान है वो, कोई खुदा नही है......
Thursday, June 18, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment