वो मुसाफिर जो मेरे घर आया था,
वो कब मेरा था, वो तो पराया था,
सारी रात हमने बातों बातों में काट दी,
फ़िर उसने उठकर मुझे जगाया था,
में हकीकत समझता रहा उस ख्वाब को "अज़ल",
शायद वो भी उसी में समाया था........
Friday, June 12, 2009
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